स्वयं सहायता समूह में नौकरी से ज्यादा डेयरी उद्योग में कमाई | dairy udyog kya hai |NABARD SCHEME

राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत चल रहे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से नौकरी पाने की इच्छुक रहती है लेकिन स्वयं सहायता समूह में अभी तक सरकार की तरफ से मासिक वेतन देने वाली नौकरी देने की घोषणा नहीं की गई। अगर आपको स्वयं सहायता समूह में नौकरी नहीं मिलती है तो आप अपना खुद का डेयरी उद्योग शुरू कर सकते हैं। डेयरी उद्योग कैसे शुरू करते हैं, डेयरी उद्योग में कितना फायदा है? आइए जानते हैं? 

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dairy udyog kya Hai डेयरी उद्योग क्या है?

डेयरी उद्योग का मतलब है गाय भैंसे पाल पर दूध निकालना और दूध से बने हुए खाद्य पदार्थ बेचना। भारत में कोरोना काल में सभी उद्योग बंद हो गए, लेकिन आपने देखा होगा कि डेयरी उद्योग पर इसका कोई असर नहीं आया। डेयरी उद्योग एक मुनाफे का सौदा है जिसे आप आसानी से शुरू कर सकते हैं। डेयरी उद्योग की शुरुआत करने के लिए आपके पास कम से कम पैसों की आवश्यकता होती है। यदि आप भैंस लेकर डेयरी उद्योग नहीं  शुरू कर सकते तो गायों से भी शुरू कर सकते हैं। डेयरी उद्योग शुरू करने के लिए भारत सरकार सब्सिडी के साथ-साथ 90% तक loan  प्रदान करती है। भारत सरकार की NABARD scheme  के तहत या सुविधाएं प्रदान की जाती है।

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 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं डेयरी उद्योग शुरू करने के लिए स्वयं सहायता समूह से laon ले सकती हैं। स्वयं सहायता समूह से डेयरी उद्योग प्रारंभ करने के लिए लोन लेने के लिए आप आपको स्वयं सहायता समूह की समूह सखी को अपने डेयरी उद्योग plan के बारे में बताना होगा। इसके बाद स्वयं सहायता समूह सखी समूह के नाम पर खोले गए खाते पर लोन लेने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरकर बैंक में जमा करेगी और बाद में आपको ₹500000 तक की धनराशि का लोन प्रदान किया जाएगा। स्वयं सहायता समूह के के लिए बैंक द्वारा दिए गए लोन पर न्यूनतम ब्याज दर पर जैसे कि 2 या 4% तक की ब्याज दर लगाई जाती है। स्वयं सहायता समूह से लोन लेना आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा।
स्वयं सहायता समूह में dairy udyog की स्थापना हेतु loan कैसे लिया जाता है। इसकी पूरी जानकारी हमने अपनी वेबसाइट पर दी है। जिसकी लिंक नीचे दी हुई है पूरी जानकारी पढ़कर आप स्वयं सहायता समूह में सिलाई कार्य व अन्य व्यवसाय हेतु loan ले सकते हैं।

भारत सरकार की नाबार्ड योजना के तहत डेयरी उद्योग के लिए laon कैसे लें?

भारत सरकार लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण स्तर पर नाबार्ड स्कीम की शुरुआत की जिसमें डेयरी उद्योग लगाने हेतु भारत सरकार की तरफ से कुल लागत का 90% लोन आपको भारत सरकार की तरफ से प्रदान किया जाता है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं यदि डेयरी उद्योग प्रारंभ करते हैं तो उन्हें 33% तक की सब्सिडी भी दी जाती है। यदि ग्रामीण क्षेत्र के पुरुष डेयरी उद्योग लगाना चाहते हैं तो उन्हें 20% से लेकर 25% तक की सब्सिडी दी जाती है। नाबार्ड स्कीम के तहत लोन लेने के लिए आपको अपने खादी ग्रामोद्योग विकास अधिकारी का पता लगाना होगा और इस योजना के लिए फॉर्म अप्लाई करना करना होगा।  नाबार्ड स्कीम के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप यूट्यूब पर सर्च कर सकते हैं

डेयरी उद्योग शुरू करने में लगने वाली लागत।

स्वयं सहायता समूह को डेयरी उद्योग शुरू करने में लगने वाली लागत का अनुमान इस प्रकार है

  1. लघु स्तर पर डेयरी उद्योग शुरू करने के लिए आपके पास कम से कम ₹200000 होने चाहिए।
  2. लघु स्तर की डेयरी उद्योग में दो  दुधारू पशुओं से लेकर पांच दुधारू पशु होनी चाहिए।
  3.  लघु स्तर का डेयरी उद्योग आप अपने घर से ही शुरु कर सकते हैं इसके अलावा यदि आप डेयरी उद्योग अपने घर से बाहर स्थापित करना चाहते हैं तो डेयरी उद्योग की छावनी तैयार करने में आपका कम से कम ₹50000 लागत आ सकती है।
  4.  इसके अलावा डेयरी उद्योग के उपकरण जैसे दूध के टैंकर, दूध को खराब होने से बचाने के लिए फ्रिज पशुओं की देखरेख के लिए नौकर इत्यादि पर आपका ₹100000 से ऊपर खर्च हो जाएगा।

डेरी उद्योग लगाने के बाद मुनाफा कैसे कमाए?

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं डेयरी उद्योग लगाने के बाद पशुओं से निकलने वाले गांव में अथवा शहरों में बेच सकती है। डेयरी उद्योग प्रारंभ करने के बाद यदि आपके क्षेत्र में आप की अच्छी खासी मार्केटिंग हो रही है तो आप दूध की पैकिंग करने की मशीन  भी खरीद सकते हैं। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं दूध से बने खाद्य पदार्थ जैसे पनीर खोया एवं आइसक्रीम की बेच सकती हैं। डेयरी उद्योग लगाकर स्वयं सहायता समूह की महिलाएं 30000 से ₹50000 महीने आसानी से कमा सकते हैं।

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